Monday, 30 May 2016

बस थोड़ा सा , करलो यक़ीन ...

वादे ,
कितने किये थे वादे,
लगते थे मुम्क़िन सब इरादे,
पर कुछ तो था,
जो होना ही था,

दिल,
क्यों किया इतना यकीन,
कि  मिट गए सब निशाँ कहीं,
मुड़के भी देखूं तो क्या है,
सिर्फ रेत , पर कदम कहीं नहीं,

मिला,
हुआ वास्ता,
एक रूह से,
जुडी दास्ताँ,
पर दिलाऊँ  कैसे अब, 
वादों पे अपने यकीन,
क्योंकि टूटना वादों का,
देखा है तुमने और मैंने भी,

बस केहना है अब येही ,
की रास्ते हैं जुड़े,
कुछ तो है क़िस्मत का मक़सद,
जो युँ हाथ अब छोड़ा,
मिट जाएगा बचा वजूद,
बिखर जाऐंगी उम्मीदें मेरी,

बस थोड़ा सा , करलो यक़ीन ... 

(c) Shilpa Sandesh


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